हिंदी व्याकरण और भाषा विज्ञान (Phonetics & Phonology) में वर्णमाला का ज्ञान होना अत्यंत आवश्यक है। जब हम किसी प्रतियोगी परीक्षा जैसे UPSC, UPTET, CTET, REET, SSC या राज्य स्तरीय परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, तो हिंदी भाषा खंड में स्पर्श व्यंजन (Plosives/Stops) और स्पर्श-संघर्षी व्यंजन (Affricates) से जुड़े प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।
सामान्यतः छात्र इन दोनों प्रकार के व्यंजनों के उच्चारण स्थान और ध्वनि प्रक्रिया में भ्रमित हो जाते हैं। इस लेख में हम अत्यंत सरल, सहज और प्रामाणिक भाषा में स्पर्श व्यंजन और स्पर्श-संघर्षी व्यंजन के बीच के अंतर को बारीकी से समझेंगे।
1. व्यंजन किसे कहते हैं? (Overview of Consonants)
हिंदी भाषा में जिन वर्णों का उच्चारण स्वतंत्र रूप से न होकर स्वरों की सहायता से किया जाता है, उन्हें व्यंजन (Consonant) कहते हैं।
जब फेफड़ों से आने वाली वायु मुख के किसी विशेष भाग (जैसे- ओष्ठ, दंत, तालु, मूर्धा या कंठ) को स्पर्श करते हुए या रगड़ खाते हुए बाहर निकलती है, तब व्यंजन ध्वनियों का निर्माण होता है। उच्चारण के इसी प्रयत्न (Manner of Articulation) के आधार पर व्यंजनों को अलग-अलग वर्गों में विभाजित किया गया है।
2. स्पर्श व्यंजन क्या हैं? (What are Plosives / Stops?)
परिभाषा:
‘स्पर्श’ का शाब्दिक अर्थ होता है — छूना। जिन व्यंजनों के उच्चारण में जिह्वा (जीभ) या ओष्ठ (होंठ) मुख के किसी विशिष्ट भाग को पूरी तरह से स्पर्श करते हैं और वायुप्रवाह को एक क्षण के लिए पूरी तरह रोक देते हैं, फिर अचानक छोड़ते हैं, उन्हें स्पर्श व्यंजन कहते हैं।
उच्चारण प्रक्रिया:
- अवरोध (Closure): मुख विवर में दो उच्चारण अवयव (जैसे जीभ और तालु) आपस में मिलकर हवा का मार्ग पूरी तरह बंद कर देते हैं।
- दाब निर्माण (Pressure): फेफड़ों से आने वाली हवा उस अवरोध के पीछे एकत्र होकर दबाव बनाती है।
- विस्फोट (Release): अवरोध अचानक हटता है और हवा एक हल्के ‘धक्के’ या ‘विस्फोट’ के साथ बाहर निकलती है। इसीलिए इन्हें आंग्ल भाषा में Plosives या Stops कहा जाता है।
स्पर्श व्यंजनों का वर्गीकरण:
हिंदी वर्णमाला में ‘क’ वर्ग से लेकर ‘प’ वर्ग तक के कुल 25 वर्ण पारंपरिक रूप से स्पर्श व्यंजन माने जाते हैं। इन्हें 5 वर्गों में बांटा गया है:
- क-वर्ग (कंठ्य – Throat): क, ख, ग, घ, ङ
- च-वर्ग (तालव्य – Palatal): च, छ, ज, झ, ञ (ध्यान दें: आधुनिक भाषा विज्ञान में इसे स्पर्श-संघर्षी माना जाता है)
- ट-वर्ग (मूर्धन्य – Retroflex): ट, ठ, ड, ढ, ण
- त-वर्ग (दंत्य – Dental): त, थ, द, ध, न
- प-वर्ग (ओष्ठ्य – Labial): प, फ, ब, भ, म
विशेष नोट: मानक भाषा विज्ञान में मुख्य रूप से 16 वर्णों को शुद्ध स्पर्श व्यंजन माना जाता है (क, ख, ग, घ / ट, ठ, ड, ढ / त, थ, द, ध / प, फ, ब, भ)।
3. स्पर्श-संघर्षी व्यंजन क्या हैं? (What are Affricates?)
परिभाषा:
स्पर्श-संघर्षी व्यंजन वे व्यंजन हैं जिनके उच्चारण का प्रारंभ तो ‘स्पर्श’ (वायु के पूर्ण अवरोध) से होता है, परंतु उसका अंत किसी विस्फोट के साथ न होकर ‘संघर्ष’ (घर्षण/Friction) के साथ होता है।
उच्चारण प्रक्रिया:
- अवरोध (Initial Stop): जिह्वा का अग्र भाग तालु को स्पर्श करके वायुमार्ग को रोक लेता है।
- धीमा मोचन (Slow Release): वायु मार्ग को अचानक खोलने के बजाय बहुत धीरे-धीरे और संकीर्ण रूप से खोला जाता है।
- घर्षण/संघर्ष (Friction): जब हवा उस संकीर्ण मार्ग से बाहर निकलती है, तो एक रगड़ या सरसराहट (Sibilant/Frictional Sound) उत्पन्न होती है।
हिंदी के प्रमुख स्पर्श-संघर्षी व्यंजन:
हिंदी भाषा में ‘च-वर्ग’ के प्रथम चार वर्णों को स्पर्श-संघर्षी माना जाता है:
- च (Unvoiced Unaspirated)
- छ (Unvoiced Aspirated)
- ज (Voiced Unaspirated)
- झ (Voiced Aspirated)
जब आप ‘त’ या ‘क’ बोलते हैं, तो हवा तुरंत बिना घर्षण के बाहर निकलती है। लेकिन जब आप ‘च’ या ‘ज’ बोलते हैं, तो जीभ तालु से हटते समय थोड़ा सा घर्षण पैदा करती है।
4. स्पर्श और स्पर्श-संघर्षी व्यंजन में मुख्य अंतर
दोनों ध्वनियों के अंतर को आसानी से समझने के लिए नीचे दी गई तालिका देखें:
| मुख्य आधार | स्पर्श व्यंजन (Plosive) | स्पर्श-संघर्षी व्यंजन (Affricate) |
| ध्वनि की प्रकृति | अवरोध के बाद अचानक विस्फोट होता है। | अवरोध के बाद धीरे-धीरे घर्षण के साथ वायु निकलती है। |
| अंग्रेजी पारिभाषिक शब्द | Plosives / Stops | Affricates |
| हिंदी वर्णमाला के उदाहरण | क-वर्ग, ट-वर्ग, त-वर्ग, प-वर्ग (क, ट, त, प आदि) | च-वर्ग (च, छ, ज, झ) |
| उच्चारण में लगने वाला समय | अत्यंत कम (क्षण भर का अवरोध) | स्पर्श व्यंजन की तुलना में थोड़ा अधिक समय |
| वायुप्रवाह की गति | तीव्र एवं त्वरित (Instant Release) | निरंतर एवं रगड़दार (Frictional Release) |
| अवयवों का अलगाव | उच्चारण अंग तुरंत अलग हो जाते हैं। | उच्चारण अंग धीरे-धीरे अलग होते हैं। |
5. उच्चारण प्रक्रिया का चित्रमय प्रवाह (Diagrammatic Flow)
ध्वनि विज्ञान की दृष्टि से दोनों के उच्चारण अंतर को इस फ्लोचार्ट से समझा जा सकता है:
स्पर्श व्यंजन की प्रक्रिया:
Plaintext
[वायु का आगमन] ➔ [पूर्ण स्पर्श व वायु अवरोध] ➔ [अचानक मोचन/विस्फोट] ➔ [स्पष्ट स्पर्श ध्वनि]
स्पर्श-संघर्षी व्यंजन की प्रक्रिया:
Plaintext
[वायु का आगमन] ➔ [पूर्ण स्पर्श व वायु अवरोध] ➔ [संकीर्ण मार्ग से धीमा मोचन] ➔ [घर्षण/रगड़] ➔ [स्पर्श-संघर्षी ध्वनि]
6. भाषा विज्ञान और परीक्षाओं की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु
यदि आप प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, तो इन सूक्ष्म अंतरों पर ध्यान देना बहुत आवश्यक है:
- पारंपरिक बनाम आधुनिक वर्गीकरण:पारंपरिक हिंदी व्याकरण में ‘च-वर्ग’ को भी स्पर्श व्यंजनों की श्रेणी में ही गिना दिया जाता है। परंतु आधुनिक भाषा विज्ञान (Modern Phonetics) में ‘च, छ, ज, झ’ को उनकी विशेष घर्षण प्रकृति के कारण स्पर्श-संघर्षी का अलग दर्जा दिया गया है।
- संघर्षी (Fricative) से भिन्नता:
- केवल संघर्षी व्यंजन (Fricative): श, ष, स, ह (इनमें प्रारंभ में पूर्ण स्पर्श नहीं होता, केवल घर्षण होता है)।
- स्पर्श-संघर्षी (Affricate): च, छ, ज, झ (इनमें पहले स्पर्श होता है, फिर घर्षण होता है)।
- घोषत्व और प्राणत्व के आधार पर:
- च: अल्पप्राण, अघोष
- छ: महाप्राण, अघोष
- ज: अल्पप्राण, सघोष
- झ: महाप्राण, सघोष
7. अभ्यास हेतु प्रश्न (Practice Questions)
आपकी समझ को परखने के लिए यहाँ कुछ संभावित प्रश्न दिए जा रहे हैं:
प्रश्न 1: निम्न में से कौन सा वर्ण स्पर्श-संघर्षी व्यंजन है?
(A) क
(B) ट
(C) ज
(D) प
उत्तर: (C) ज
प्रश्न 2: स्पर्श व्यंजन के उच्चारण में वायु किस प्रकार बाहर निकलती है?
(A) केवल घर्षण के साथ
(B) बिना किसी रुकावट के
(C) रुकावट के बाद अचानक झटके से
(D) केवल नाक के द्वारा
उत्तर: (C) रुकावट के बाद अचानक झटके से
निष्कर्ष (Conclusion)
हिंदी भाषा की वर्णमाला अत्यंत वैज्ञानिक और तर्कसंगत है। स्पर्श व्यंजन और स्पर्श-संघर्षी व्यंजन का अंतर मुख्य रूप से वायु के मोचन (Release) की प्रक्रिया पर निर्भर करता है। जहाँ स्पर्श व्यंजन में वायु अवरोध के पश्चात् त्वरित विस्फोट के साथ बाहर आती है, वहीं स्पर्श-संघर्षी में वायुमार्ग धीरे-धीरे खुलने के कारण एक विशेष रगड़ या घर्षण की ध्वनि उत्पन्न होती है।
इन सूक्ष्म भाषाई नियमों को समझ लेने से न केवल आपकी उच्चारण शुद्धता में सुधार होगा, बल्कि हिंदी व्याकरण से जुड़ी परीक्षाओं में भी आप बेहतर अंक प्राप्त कर सकेंगे।
![]()